Friday, February 5, 2016

यहीं कहीं ....

तू है यहीं कहीं
यहीं कहीं तेरी हसीं
सांचेसे ख्वाबसी
खिलखिलाती है
मुझे बुलाती है


बे-ख़िरद हर तरफ़
तेरी महक ढूंढे है ये दिल
तेरा नूर तेरा सुरूर
तेरा गुरुर है मुझमें शामिल


तू है यहीं कहीं
यही कही किसी जानिब
खड़ी मेरी साहिब
हर चीज़ से वाकिफ़
बनती अंजानी है
मुझे चिढ़ाती है

कई हर्फ़ किए खर्च
पर मर्ज़ तेरी यादोंका ना उतरे
मेरी नज़्म न हो ख़त्म
बस अश्क़ही कागज़ोंपे बिखरे

तू है यहीं कहीं
यही कही आँखमें
धिमीधिमीसी आँचपे
नज़रोंके आडसे
यूँ गुजरती है
मुझे जलाती है

तू है यहीं कहीं ....