दिन ये ढलताही नहीं
दिल सवरताही नहीं
बेमानी है जाम सारे
होश उतरताही नहीं
कबसे चुभ रहा आँखोंमे
पल गुजरताही नहीं
आईना ये अक्सको बोले
तुझे पहचानाही नहीं
छेडो ना अब उसकी नज्मे
दिल क्यूँ समझताही नहीं
दिल सवरताही नहीं
बेमानी है जाम सारे
होश उतरताही नहीं
कबसे चुभ रहा आँखोंमे
पल गुजरताही नहीं
आईना ये अक्सको बोले
तुझे पहचानाही नहीं
छेडो ना अब उसकी नज्मे
दिल क्यूँ समझताही नहीं