Monday, November 16, 2009

ummed

उम्मीद
एक झटपटाहतसी होती है जीनेमे
जिंदगी जैसे थमसी है
कभी सागरमें उमड़ती लहरोँकितरह थी
और अब .. बादलमें फसी बूँदोंकितरह हो गयी है
ना जाने कब बरसने मिले...
और जिंदगी फिरसे बहने लगे

लग रहा है की जैसे सब दूर जा रहा है
और फासलें करीब आ रहे है
पलकोंके पीछे क़ैद कमरेमे
कुछ और आसू शामिल हो रहे है
वो आसू बह ना जाए कहीं ....
और धीरज फूट ना जाए कहीं ....

कहीं सूरज मिल जाए इसे
और जिंदगी फिरसे बहने लगे


जिंदगीकी किताबमें उमीद का पन्ना तो ज़रूर होगा
साँसे पढ़ले उसे बस...
उनकीभी जानमें जान आ जाए
फिर आनेदे कोई भी तूफ़ान...
आँखोंमें आँखे डाल कहेंगी ये साँसे
ज़रा टकराके तो दिखा....
ज़रा हराके तो दिखा...

बस साँसे टकराएँ उम्मीदसे
और जिंदगी फिरसे बहने लगे..

Thursday, July 16, 2009

first blog

'Chandamaama' is my first attempt to publish my hindi poems on the blog . It was written for my sweet 'bhanjaas and bhaanjee'.

चंदामामा

सुलगे रातभर काली सेज़पर

झाके छत पर, कभी पेड़ पर
ताल मे अपनी सूरत देखकर

छुप जाता है बादल ओढकर

चंदा... रे चंदामामा...



थके हुएको चैन बाट्ता है

सपनोंकि रैन बाट्ता है

अंधेरोंसे लटके हुए तारोंमेसे राह ढूंडता है...

चंदा... रे चंदामामा...



कभी आधा है.. कभी पूरा है..

कभी छोटा है.. कभी बड़ा है..

नाइट ड्यूटी हरारोज़ तेरी..एक दिनकीही छुट्टी है ..

चंदा... रे चंदामामा...



बडीसी थैलीमे रातको लेके..

उड़ जाता है चुपके चुपके..

आँख खुले तो पता चले के

चाँद फरार है निंदको लेके...

चंदा... रे चंदामामा...



Words of appreciation and critisism, both will be equally appriciated..

cheese :D