Tuesday, March 13, 2012

बारिश का घर

ईस आसमा की डोर कर
खिचलू बादल जमीपर
और आज अभी यही इधर
तेरे लिए सजाऊ बारीश का घर..

बारीश के घर मे, बादल की छत
दीवारें बादलकी , बादल के फर्श
बिजली गिलीसी, झूले बादलमें
एक मोतीसा बादल, भरू तेरे आचलमें
घुल जाए एक-दूजेमे, पहनके हरा रंग...
तेरे लिए सजाऊ बारिश का घर ...

बारीश के आँगन मे,
धूप सांझी उगाएँगे
सुबह सुबह किरणोन्की,
बूंदे केसरी बटोरेंगे
छिड़केंगे उन्हे यूँ बरसातीमें,
और सतरंगी इंद्रधनुष बनाएँगे,
सपनोंका का भी सपना होगा ये घर
तेरे लिए सजाऊ बारिश का घर ...