'Chandamaama' is my first attempt to publish my hindi poems on the blog . It was written for my sweet 'bhanjaas and bhaanjee'.
चंदामामा
सुलगे रातभर काली सेज़पर
झाके छत पर, कभी पेड़ पर
ताल मे अपनी सूरत देखकर
छुप जाता है बादल ओढकर
चंदा... रे चंदामामा...
थके हुएको चैन बाट्ता है
सपनोंकि रैन बाट्ता है
अंधेरोंसे लटके हुए तारोंमेसे राह ढूंडता है...
चंदा... रे चंदामामा...
कभी आधा है.. कभी पूरा है..
कभी छोटा है.. कभी बड़ा है..
नाइट ड्यूटी हरारोज़ तेरी..एक दिनकीही छुट्टी है ..
चंदा... रे चंदामामा...
बडीसी थैलीमे रातको लेके..
उड़ जाता है चुपके चुपके..
आँख खुले तो पता चले के
चाँद फरार है निंदको लेके...
चंदा... रे चंदामामा...
Words of appreciation and critisism, both will be equally appriciated..
cheese :D
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