Friday, March 5, 2010

फिरसे ये जिंदगी ...... खुलके है हसीं

माथेपे शिकंज लिए
आँखे थी जागती
टाइम मिले तो
नींदोमें सपनेभी देखती

अब जाके पिंजरेसें
उड़ के ये चली
फिरसे ये जिंदगी
खुलके है हसीं

वक़्तके टीचर ने
मुर्गा बनाया इसे
वक़्तही ना रोक पाया
स्कूल की घंटी जब बजी

अब जाके पिंजरेसें
उड़ के ये चली
फिरसे ये जिंदगी
खुलके है हसीं

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