ईस आसमा की डोर कर
खिचलू बादल जमीपर
और आज अभी यही इधर
तेरे लिए सजाऊ बारीश का घर..
बारीश के घर मे, बादल की छत
दीवारें बादलकी , बादल के फर्श
बिजली गिलीसी, झूले बादलमें
एक मोतीसा बादल, भरू तेरे आचलमें
घुल जाए एक-दूजेमे, पहनके हरा रंग...
तेरे लिए सजाऊ बारिश का घर ...
बारीश के आँगन मे,
धूप सांझी उगाएँगे
सुबह सुबह किरणोन्की,
बूंदे केसरी बटोरेंगे
छिड़केंगे उन्हे यूँ बरसातीमें,
और सतरंगी इंद्रधनुष बनाएँगे,
सपनोंका का भी सपना होगा ये घर
तेरे लिए सजाऊ बारिश का घर ...
खिचलू बादल जमीपर
और आज अभी यही इधर
तेरे लिए सजाऊ बारीश का घर..
बारीश के घर मे, बादल की छत
दीवारें बादलकी , बादल के फर्श
बिजली गिलीसी, झूले बादलमें
एक मोतीसा बादल, भरू तेरे आचलमें
घुल जाए एक-दूजेमे, पहनके हरा रंग...
तेरे लिए सजाऊ बारिश का घर ...
बारीश के आँगन मे,
धूप सांझी उगाएँगे
सुबह सुबह किरणोन्की,
बूंदे केसरी बटोरेंगे
छिड़केंगे उन्हे यूँ बरसातीमें,
और सतरंगी इंद्रधनुष बनाएँगे,
सपनोंका का भी सपना होगा ये घर
तेरे लिए सजाऊ बारिश का घर ...
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