ये साली जिंदगी
फिरसे आँधे मुँह गिरी
कूद पड़ी थी मिज़ाससे
अंधे कुँएमें राह ढुन्डती
ये साली जिंदगी
फटे हुए जेबमें कुछ कतरें समय के थे
भरोसेकि पुडीमें कस्के बाँध के रखे थे
न जाने किस झोंकेने बटवा उड़ाके मार लिया
या फिर फटी जेबसे कही मैनेही उसे खो दिया
अब भी है भागती रहती
बस पाँवोंतले ज़मीं नही रही
अब एकही जगहपे
उछलती फुदकती कूदती गिरती
ये साली जिंदगी...
No comments:
Post a Comment