रसिया बोलत नाही
अधरपटल को खोलत नाही
रसिया बोलत नाही
मनमें गाँठ ... बनाए है कुछ
रुत पतझड़की.... सताए है कुछ
सुरसंग काहे मन डोलत नाही
रसिया बोलत नाही
गुलरंग जियासंग ... खेलत नाही
झूठमूठ राज सब... भावत नाही
तोरा संग किसीसंग तोलत नाही
रसिया बोलत नाही
रिमझिम गिर गिर.....बूँद सताए
आँखियॉंका सावन ये....ढल ना पाए
तोरा मुख छीन नैन छोड़त नाही
रसिया बोलत नाही
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