घे ऋतू संग .... दिगंत तू
ऊड भानुसन्गे ... विहंग तू
चराचरी या नश्वर काया
एकटाच अथांग अभंग तू
चाल तेज-वाट .. पहाट तू
बोल अमृताच्या .... सूरात तू
जलदाहाति डोर जयाची
अनंत उंच ..... पतंग तू
तू विनाशनाशी .... अविनाश तू
तू ब्रह्मा तू विष्णू... महेश तू
काळरन्गी नाहला जो
चिररंग ... अंतरंग तू
kavita ekdum mast ahe
ReplyDeletepan faar hi fi marathi vaparala samaj
Harshya ek no. kavita ahe... keep it up dude..
ReplyDeletethnks...
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