Monday, May 16, 2011

कभी जिंदगी


कभी उलझी पहेलिसी जिंदगी
कभी रूठी सहेलिसी जिंदगी
जितना कसके पकडो मुठ्ठीमे
हाथसे  फिसले रेतसी ये जिंदगी


कभी मिस्रिसे मीठी ये जिंदगी
कभी मिर्चिसी तीखी ये जिंदगी
कभी खुशियॉंका तड़का ये जिंदगी
कभी करेला कडवा ये जिंदगी
कौन बुझे है क्या स्वाद होगा
हर पल जायका बदलती ये जिंदगी

कभी तेरी जिंदगी मेरी जिंदगी
कभी मेरी जिंदगी ना मेरी जिंदगी
कभी मौतसे बत्तर जिंदा ये जिंदगी
कभी जिंदेसेभी जिए अजर मुर्दा ये जिंदगी


कभी पल पल लगाए दावपे
हार जाए जुआरी ये जिंदगी
कभी सुख बेचे दुखके भावपे 
ठग जाए ब्यापारी ये जिंदगी


कभी हाथमे हाथ दे ये जिंदगी
कभी पीछेसे लात दे ये जिंदगी
सोचो तो पड़ी उम्रभर है
और सोचो तो खड़ी हर लम्हेमे है
बाहे फैलती ये जिंदगी


                  ---- हर्षल

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