Tuesday, July 6, 2010

ये लम्हे जाली है

ये लम्हे जाली है
बिल्कुल खाली खाली है

वक़्तकी धड़कन जैसे थमसी गयी है
साँसे बरफसी जैसे जमसी गयी है
पल तो कटता है
पर ना लगता है
की जिंदगी आगे चली है

सुबहसे ये रात...कट ना रही है
ज़ुबाँसे कोई बात ... छूट ना रही है
अंधेरी झरनोंसे
सुबहकी किरणोंमें
रातकी स्याही मिली है



2 comments:

  1. it's a wonder .. the way u express these poems so easily in marathi as well in hindi with the same command !!!!

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  2. thanks for the compliment....:)

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